
उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना में एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। 24 वर्षीय उज्ज्वल राणा, डीएवी पीजी कॉलेज का छात्र, ने सिर्फ 7,000 रुपये की फीस न भर पाने की वजह से खुद को क्लासरूम में आग लगा ली।
फीस नहीं भरी तो परीक्षा से बाहर — और फिर…
रिपोर्ट्स के मुताबिक उज्ज्वल को परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया क्योंकि उसकी फीस बाकी थी।
वो बार-बार कॉलेज प्रशासन से गुहार लगाता रहा — “सर, कुछ दिन का वक्त दे दीजिए, मैं फीस जमा कर दूंगा…”
लेकिन जवाब मिला — “जिसके पास पैसे नहीं, उसे पढ़ने का हक नहीं।”
उसके बाद उज्ज्वल ने जो किया, उसने पूरे कॉलेज और समाज को झकझोर दिया।
वीडियो में उज्ज्वल ने छोड़ा दर्द का संदेश
घटना से पहले उज्ज्वल ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें वो कह रहा था कि उसे धक्का देकर कॉलेज ऑफिस से बाहर निकाला गया, और अपशब्द कहे गए।
उसने कहा — “मैं गरीब हूँ तो क्या इंसान नहीं हूँ?”
वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है और लोगों में गुस्सा साफ़ दिख रहा है।

कॉलेज का बयान — ‘गरीब नहीं था छात्र’
डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल प्रदीप कुमार सिंह ने बयान दिया कि — “उसने सिर्फ 1,750 रुपये जमा किए थे, बाकी फीस नहीं दी। वो रोज़ मोटरसाइकिल से आता था, उसके पास महंगा मोबाइल था — वो गरीब कैसे हो सकता है?”
यह बयान अब खुद विवादों में है। लोग पूछ रहे हैं — “क्या गरीबी अब मोबाइल और बाइक से तय होगी?”
पुलिस और प्रशासन पर भी सवाल
उज्ज्वल के सुसाइड नोट में तीन पुलिसकर्मियों और कॉलेज प्रशासन का नाम है। पुलिस ने प्रिंसिपल पर BNS की धारा 351(3) और 352 में मामला दर्ज किया है। फिलहाल उज्ज्वल मेरठ अस्पताल में भर्ती है, हालत स्थिर बताई जा रही है।
सिस्टम पर सवाल — शिक्षा बिक रही है क्या?
यह घटना सिर्फ एक कॉलेज या एक छात्र की नहीं, बल्कि पूरे देश के उस शिक्षा सिस्टम की पोल खोलती है जहां फीस, यूनिफॉर्म और एडमिशन के बीच इंसानियत जल रही है। “किताबों की कीमत अब नोटों से मापी जाती है — और सपनों की कीमत… ज़िंदगी से।”
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